मै नही गुरू अब
प्रश्न पत्र मे मोती लाया
मैने तुम्हारी परिक्षा मे
उत्तर दे तुम खुशियाँ चुन लो
या बिखेर आगन मे
मैने तुमको बहुत समझाया
पर न समझे नादानी मे
ओवर कानफीडैस मे अपना
समय गवाया मस्ती मे
कभी बुददीमता दिखाई न तुमने
मेरे टेस्ट और परिक्षा मे
फिर काहे को आश लगाई
प्रेक्टिकल के नंबर मे
भरने को भरदी झोली तुमने
ज्ञानी समझा पढाने मे
हमे अंगूठा टैक समझा
तुमने भरी कलासो मे
अपमानों के कडवे घूट को
मैने उतारा हलको मे
शब्दो की उपाधियों से कितनी
तुमने नवाजा कक्षा मे
मै न भूलूंगा और न तुम
हम दोनो ही थे लाचारी मे
लिया दिया सब यही बराबर
गीता के उपदेशों मे
न दूंगा वरदान श्राप तुम्हे
न द्वेष हर्ष अपने मन मे
भाप लेना तुम मुझको
अपनी सफलता असफलता मे
मनोज दुबे श्रीकांत

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