Thursday, January 9, 2020

क्यो थमा रहे हो डंडे



थमा रहे हो डंडे क्यो कलम की जगह हाथ में
रंग स्याही का बदल रहे हो क्यों रक्त में
 देश के छात्रों को पढ़कर गढ़ने दो भविष्य
राष्ट्र को ढकेल रहे हो क्यो सब  गर्त में
दाल गलाने को अपनी वोट बैंक की 
करा रहे हो दंगे क्यो शिक्षक संस्थान में
जेएनयू और जामिया के साथ देश झुलसा ल
गा रहे हो आग क्यो देश की फिजां  मे
खुली हवा में ले रहे हो सांस आजाद की
 आजादी छीन कर लेने की चाह क्यो देश में
इरादे बदल डालो अपनी राजनीति के श्रीकांत
मिटा रहे हो क्यो  अपने आपको इतिहास मे

मनोज दुबे श्रीकांत 

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