कोरोना चालीसा
प्रमाणपत्र
यह रचना सवयंलिखित है व इसके समस्त अधिकार रचनाकार के पास सुरक्षित है
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दोहा :- जग में धूम मचा रहो कोरोना को नाम !
सारे जन परेशान है नागरिक खास आम ।।
कोरोना तुम जग मे आये।
दुख भारी बीमारी लाये ।।
चीन से तुम उपजे कैसे ।
इसे जग में तुम फैले कैसे।।
रूप भयंकर रख तुम आते ।
लोगों को पीड़ित कर जाते.।।
तुमरे भय से सब जन कापे।
कोप से सब डरके भागे ।
नाम का जग मे बाजे डंका
सबके मन मे उपजे शंका ।।
सबके मन मे उपजे शंका ।।
पीड़ित जन की हाहाकार ।
सिर्फ कोरोना ही पुकार ।।
सुरसा से तुम जग में फैले ।
मानव बिल्कुल पड़े अकेले।।
तुम्हारी महिमा अपरंपार ।
डॉ वैद्य नही पावे पार । ।
सजीव निर्जीव में तुम आते.।
मोनेरा जगत में स्थान पाते ।।
गोलाकार है रूप तुम्हारा।
ताज सा सोवै जो न्यारा ।।
सूक्ष्म रूप में तुम हो बसते।
नैनोमीटर में तुम नपते।।
सार्स और मर्स रूप मे आते।
मानव जन को खूब सताते ।।
वातावरण में तुम विचरते।
कोशिका से मिल बृद्धि करते ।।
डीएनए द्विगुणन करते।
गुणात्मक रूप से तुम बढ़ते !!
सारे जग में वास तुम्हारा।
अन्न जल वातावरण सारा।।
मांसाहार मे सदा रम जाते ।
कालोनी में तुम बसे जाते ।।
सांप चमगादड़ पक्षी सोहे ।
कच्चा मांस तुमरे मन मोहै।।
संक्रमण सबमें फैलाते।
रोग से तुम कहर बरपाते।।
लक्षण सदा सहज ही दिखते।
निमोनिया से मिलते जुलते ।।
सर्दी जुकाम खांसी सतावे।
शरीर ज्वर से जब तप जावे।।
गले खराश हो खांसी भारी ।
सांस लेने में हो परेशानी ।।
कोई काम मे मन न भावे ।
चलने में थकान सतावे।।
कोरोना के लक्षण जानो ।
सलाह डॉक्टर की तुम मानो।।
जो उपचार डॉक्टर देवै।
डोज दवाई को पूरा लेवे ।।
काम ऐसा कोई करो ना ।
पास आए जो कोरोना।।
हाथ मिला न अभिवादन कीजो।
जोड़कर हाथ नमस्ते कीजो ।।
हाथ रूमाल सदा रख लीजो ।
छीकत खासत मुख पे कीजो।।
मुंह में अपने मास्क लगाओ ।
भीड़ भाड़ में तुम ना जाओ। ।
ठंडा डेयरी उत्पाद न खाओ
ताजा शुद्ध भोजन अपनाओ । ।
शाकाहार को तुम अपनाओ।
कोरोना को दूर भगाओ ।।
बीडी तंबाकू सिगरेट न पीजै ।
व्यसन सारे तुम तज दीजै।।
तुलसी का नित सेवन कीजे ।
प्रतिरोधकता मजबूत कीजै।।
तुलसी का नित सेवन कीजे ।
प्रतिरोधकता मजबूत कीजै।।
व्यापार तुम प्रभावित करते ।
देश की इकानामी गिराते।।
देश की इकानामी गिराते।।
प्रतिजैविक असर न करते ।
वैक्सीन से सदा तुम डरते ।।
दुनिया उपचार खोज के हारी ।
तुमरो दंश घातक है भारी ।।
संक्रमण को और न फैलाओ ।
पीड़ित जन से दूरी बढ़ाओ.।।
साबुन से सदा हाथ धोना ।
दूर हो जाए विषाणु कोरोना।।
मन में तनक न संशय कीजै।
आत्मबल को मजबूत कीजै।।
अफवाह को तुम मन न लाओ ।
कोरोना का विषाणु भगाओ।।
अफवाह को तुम मन न लाओ ।
कोरोना का विषाणु भगाओ।।
बीमारी कोरोना ना भारी ।
जिससे जीते ना दुनिया सारी।।
दोहा :- कोरोना के रोना से हो पाए न अब काम ।
सावधानी अपनाकर कीजो काम तमाम।।
रचनाकार मनोज कुमार दुबे श्रीकांत
शनिचरा मोहल्ल कोकोरीघा होशंगाबाद
मोबाइल 8770507682
रचनाकार मनोज कुमार दुबे श्रीकांत
शनिचरा मोहल्ल कोकोरीघा होशंगाबाद
मोबाइल 8770507682

उम्दा
ReplyDeleteउम्दा
ReplyDeleteUnique and contemporary weldone
ReplyDeleteधन्यवाद
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