मोबाइल की पुनर विचार याचिका
हमारा मोबाइल ने हमारे निर्णय
पर पुनर याचिका दायर की
उसमे उसने अपनी बात कुछ
इस प्रकार की कहने लगा
भैया आजकल तुम मुझे घर
से ले जाकर डिब्बे मे बंद
कर देते हो मेरा दम ही उस डिबबै
मे घोट देते हो मेरे जैसे कई
मोबाइल उस डिब्बे मे पडे रहते हैं
हम अपना अपना दुखड़ा
ऐक दूसरे से कहते रहते हैं
बाहर कब निकलेंगे
इंतजार करते रहते है
एक एक कालखंड भैया
भारी पड़ता है और दिन कुछ
लोगो के मोबाइल की ही
घंटी सुन सुन कर के गुजरता है
आप तनक मेरी और मेरे जैसे
अन्य साथियों की दशा पर विचार
कीजिये और मुझे इस
घुटन से मुक्त कीजिये
मैने कहा भैया मै तुम्हारी
लाचारी को समझता हूँ
मगर कुछू कर नही सकता हूँ
मै भी बहुत ही मजबूर हू
मै तुम्हारी पुनर विचार याचिका
को उपर तक पहुँचा दूंगा
यदी हुआ तो तुम्हारे डिब्बे की
घुटन से मुक्ती का जतन कर दूंगा
मगर हल मुझे कुछ नही दिखता है
तुम रहोगे यू ही बंद
डिब्बे मे ऐसा लगता है
क्योंकि पुनर्विचार याचिका
अपने देश मे रद्द होती है
जीत कैसे भी हो भैया
कानून की होती है
हम अगले दिनो मे तुम्हे
खुली हवा मे सास लेने के लिए
घर पर ही छोड़ देगें
और तुम्हे उस डिब्बे की
घुटन से मुक्त कर देंगे
No comments:
Post a Comment