तुमहारी मुस्कुराहटो से
तुम्हारी मुस्कुराहट से ही सब धन बरस जाता है
मेरा घर आंगन कौना कौना खुशियों से भर जाता है
तुम लक्ष्मी अन्नपूर्णा सी जब मेरे घर मे रहती हो
मेरे घर का अन्न धन का सारा भंडार भर जाता है
हीरे जवाहरात सोने चांदी रत्न सब फीके पड जाते
सरल सहज सौम्य तुम्हारा व्यवहार झलक जाता है
धन दौलत सुख संपन्नता ऐश्वर्य सब कुछ ही तुम हो
तुमहारे साथ होने से सब कुछ सहज मिल जाता है
क्या दशहरा दीपावली होली या और कोई त्यौहार
तुम्हारी खुशियों से ही मेरा हर दिन उत्सव हो जाता है
प्रिय तुम हो श्रीकांत के संग तो कोई गम नही और
सुख दुख चाहे हो जीवन मे सब सूकून से गुजर जाता है
मनोज दुबे श्रीकांत
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