Thursday, November 19, 2020

गजल

 तुमहारी मुस्कुराहटो से 


तुम्हारी मुस्कुराहट से ही  सब धन बरस जाता है

मेरा घर आंगन कौना कौना खुशियों से भर जाता है


तुम लक्ष्मी अन्नपूर्णा सी  जब मेरे घर मे रहती हो

 मेरे घर का अन्न धन का   सारा भंडार भर जाता है


हीरे  जवाहरात सोने चांदी रत्न सब फीके पड जाते

 सरल सहज सौम्य तुम्हारा व्यवहार झलक जाता है


धन दौलत सुख संपन्नता ऐश्वर्य सब कुछ ही तुम हो

तुमहारे साथ होने से सब कुछ सहज मिल जाता है


क्या  दशहरा दीपावली  होली   या और कोई त्यौहार

तुम्हारी खुशियों से ही मेरा हर दिन उत्सव  हो जाता है


प्रिय तुम हो श्रीकांत के संग तो कोई गम नही और 

सुख दुख चाहे हो जीवन मे सब  सूकून से गुजर जाता है 


मनोज दुबे श्रीकांत

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