रात का सपना
कल रात को दीपावली की
पूजा के बाद जब मे सोया
गहरी नींद मे सपनो मे खोया
तो एक अजीब सपना आया
लक्षमी जी का वाहन उललू आया
कहने लगा भैया तुम लक्ष्मी
जी के आने के चककर मे
अपने हाथ की लक्ष्मी गवा देते हो
साफ सफैयत लीपा पोती
सजावट लड़ पटाखा मे
कितने रूपये गवा देते हो
इसी खर्चे को लेकर धन तेरस से
दीपावली तक अक्सर तुममे और
तुमहारी पतनी मे खटक जाती है
और भाई साहब अपने घर की
लक्ष्मी माता लक्षमी की
प्रसन्नता की खातिर रूठ जाती है
पहले अपनी अपनी गृह लक्ष्मी को
मनाया कीजिए वो जो बोले
वो वो ही किया कीजिए
कयोकि श्रीमन शास्त्र भी
झूठ नही बोलते हैं जहा रहती है
पत्नी प्रसन्न वही देवता रमते है
धन दोलत सुख ऐश्वर्य
सब कुछ सहज ही मिल जाता है
और भाई साहब पत्नी की
प्रसन्नता से और माता लक्ष्मी का वरदान भी
फल जाता है
मैने कहा उललू महाराज आप
बिलकुल सही फरमा रहे है
माता लक्षमी का इंतजार है
हमे आखिर कब बुला रहे है
तभी मेरी आखो के सामने
बहुत तेज प्रकाश छा गया।
माता लक्ष्मी का मुस्कुराती
छवि का दीदार हो गया
फिर उनहोने मुझे धन धान्य
सुख संपन्नता का वर तो दिया
पर जाते जाते मेरा मन खट्टा कर दिया
कहने लगी गृह लक्ष्मी को खुश
रखोगे तो दीपावली पर मेरी कृपा
सहज ही पा जाओगे
और घर लिपाई पुताई लड़ बम पटाखा
मिठाई नए कपडे लतते के
खर्चे से बच जाओगे ऐसा सुनकर
मेरा सपना टुट गया और मेरा
मन पतनी को खुश रखने की उधेडबुन मे लग गया
पत्नी को हर वक्त खुश रखना टेढ़ी खीर लग रहा था
दीपावली के सारे खर्चे का बोझ
उससे कही हलका लग रहा था
मनोज दुबे श्रीकांत होशंगाबाद
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