Thursday, November 19, 2020

कुत्ता व्यंग्य

 तैसार होते देख


कल हमे तैयार होते

 देख कुत्ता गुरराया

बहुत दिनो बाद सकूल 

जा रहे हो फरमाया

क ई दिनो से  लाकडाऊन मे 

पडे पडे खा रहे थे

घर मे पत्नी बच्चो 

को टोक रहे थे

रात भर तुम्हारे घर की 

रखवारी के बाद

दिन मे दिन मे सोना 

मुशिकल कर रहे थे

तुम्हारे स्कूल जाने से मेरा

 भी जायका बदल जाएगा

और बहुत दिनो से रुखी रोटी से

 कुछ अचछा मिल जाएगा

तुमहारी आधी पीएमएस से 

घर खरच नही चल रहा है

भाभी जी और तुम्हारी 

बहस मे मेरा टेंशन बढ रहा है

भगवान करे अब तुम्हारे 

सकूल कभी बंद न हो

और थरटी फिफटी 

पेमेंट से जलदी ही फुल हो

मैने कहा गांव बसा नही 

और लुटेरो सी नजरे गढा रहा है

अभी सकूल को निकला 

नही तू नजर लगा रहा है

दुबे जी नजर नही ये बंदा 

भैरव के रूप मे आशीर्वाद दे

 रहा है और करोना लाकडाऊन 

फिपटी थरटी पेमेंट का  वक्त 

अब जा रहा है ईश्वर तुमहारे

 रोजगार वेतन को सलामत 

रखता रहे 

और तुमहारे   

दुशमनो का मुह काला  करता रहे

मनोज दुबे श्रीकांत

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