Thursday, September 17, 2020

 कुछ यादे मन को ताजा कर जाती है और वो बाते जो हमारे जीवन की अहम तो फिर कहने ही क्या है हर ऐक के जीवन का वह दौर जब वो रूबरू होता है अपनी पहली मोहब्बत से दूसरी तीसरी से नही

   कहो तो ले चलू तुमको 





तुम कहो तो  चलो ले चलू तुमको

पुरानी यादों के दिनो मे  फिर तुमको

देखने को उसको जी भर के फिर से 

कालेज के  उस जमाने फिर तुमको


करा दू याद पहली मोहब्बत को

इश्क के वादे कशमे सब तुमको

देखना उसका पलटकर के लजा के

दोस्तो के संग मुस्कुराना तुमको

तुम कहो तो  चलो ले चलू तुमको

पुरानी यादों के दिनो मे  फिर तुमको 


चाहना बार बार मिलना उससे 

घंटो  उससे बात करना  तुमको 

कालेज के वो पेड़ों के झुरमुट मे 

टिपटी पर संग मे बैठना तुमको 


तुम कहो तो  चलो ले चलू तुमको

पुरानी यादों के दिनो मे  फिर तुमको


हथेली  पर नाम लिखना उसका 

किताब मे रख खत देना तुमको 

जवाब मे उसकी हा सुनने को 

कलास मे बेताब होना तुमको 

तुम कहो तो  चलो ले चलू तुमको

पुरानी यादों के दिनो मे  फिर तुमको

गली मोहल्ला करना उसका एक 

सज सवरकर देखना  तुमको 

चुपके चुपके से निकल कर घर से 

छत पर शाम को देखना तुमको 

तुम कहो तो  चलो ले चलू तुमको

पुरानी यादों के दिनो मे  फिर 

अपने मन की सब  बातो को 

छोटी बहना को बताना तुमको

बात बात पर बाबू जी का डाटना 

मा को साथ तुम्हारा देना तुमको 

तुम कहो तो  चलो ले चलू तुमको

पुरानी यादों के दिनो मे  फिर तुमको


बाते कुछ मीठी मीठी खटटी खटटी सी 

निकालकर यादो के एलबम से तुमको 

पहली बार की पहली पहली उससे  

मोहब्बत की वो   मुलाकात   तुमको 

तुम कहो तो  चलो ले चलू तुमको

पुरानी यादों के दिनो मे  फिर तुमको

देखने को उसको जी भर के फिर से 

कालेज के  उस जमाने मे तुमको



मनोज दुबे श्रीकांत 



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