हाथो मे हाथ जरा रहने दे
मेरे हाथों में तेरा हाथ जरा रहने दे
कुछ बाते मेरे मन की जरा कहने दे
बैठू कुछ पल को तेरे सामने तो मैं
मेरी आंखों आंखों को जरा मिलने दे
कुछ कह दूं मैं और कुछ कहते तू अपनी
बातें दिलो की गौर से जरा सुनने दे
अभी अभी तो बैठी हो मेरे पास में तुम
4:00 बज गए है अभी जरा ढलने दे
सुहानी शाम से ढलती रात तक रुको तुम
बातें प्रेम की अपनी परवान जरा चढने दे
मोहबबते मेरी बिंदास है समझ ले श्रीकांत
कोई नयी कहानी अपनी भी जरा बनने दे
मनोज दुबे श्रीकांत
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