Wednesday, September 23, 2020

गजल

 बड़ी ही खूबसूरत लगती हो फेसबुक और तुम 

मुझे तो तुम अपनी लगती हो फेसबुक और तुम


 लाइक टैग कमेंट पर गुजर जाता है वक्त मेरा  

मोबाइल पर जब आती हो फेसबुक और तुम


 आन लाइव रूम से बहल जाता है मन मेरा

 बात जब कभी कर लेती हो फेसबुक और तुम


 सुंदर दोनों  लगती हो इसमें कोई दो बात नहीं

 बड़ी ही हसीन लगती हो फेसबुक और तुम 


अदाए तुम दोनो की है ऐक से बढकर के ऐक 

 कितना जुल्म सा  करती हो फेसबुक और तुम


मन मेरा भरने लगता है उड़ान अनंत आकाश

मन जब समा जाती हो फेसबुक और तुम 


 रहती हो पास तो अच्छा लगता है मन को मेरे 

दूर हो  तो  बेचैन कर देती हो फेसबुक और तुम


 मोहब्बत हुई है श्रीकांत को दोनों से इस कदर

 दिल के पास पास लगती हो फेसबुक और तुम



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