कुछ यादे मन को ताजा कर जाती है और वो बाते जो हमारे जीवन की अहम तो फिर कहने ही क्या है हर ऐक के जीवन का वह दौर जब वो रूबरू होता है अपनी पहली मोहब्बत से दूसरी तीसरी से नही
कहो तो ले चलू तुमको
तुम कहो तो चलो ले चलू तुमको
पुरानी यादों के दिनो मे फिर तुमको
देखने को उसको जी भर के फिर से
कालेज के उस जमाने फिर तुमको
करा दू याद पहली मोहब्बत को
इश्क के वादे कशमे सब तुमको
देखना उसका पलटकर के लजा के
दोस्तो के संग मुस्कुराना तुमको
तुम कहो तो चलो ले चलू तुमको
पुरानी यादों के दिनो मे फिर तुमको
चाहना बार बार मिलना उससे
घंटो उससे बात करना तुमको
कालेज के वो पेड़ों के झुरमुट मे
टिपटी पर संग मे बैठना तुमको
तुम कहो तो चलो ले चलू तुमको
पुरानी यादों के दिनो मे फिर तुमको
हथेली पर नाम लिखना उसका
किताब मे रख खत देना तुमको
जवाब मे उसकी हा सुनने को
कलास मे बेताब होना तुमको
तुम कहो तो चलो ले चलू तुमको
पुरानी यादों के दिनो मे फिर तुमको
गली मोहल्ला करना उसका एक
सज सवरकर देखना तुमको
चुपके चुपके से निकल कर घर से
छत पर शाम को देखना तुमको
तुम कहो तो चलो ले चलू तुमको
पुरानी यादों के दिनो मे फिर
अपने मन की सब बातो को
छोटी बहना को बताना तुमको
बात बात पर बाबू जी का डाटना
मा को साथ तुम्हारा देना तुमको
तुम कहो तो चलो ले चलू तुमको
पुरानी यादों के दिनो मे फिर तुमको
बाते कुछ मीठी मीठी खटटी खटटी सी
निकालकर यादो के एलबम से तुमको
पहली बार की पहली पहली उससे
मोहब्बत की वो मुलाकात तुमको
तुम कहो तो चलो ले चलू तुमको
पुरानी यादों के दिनो मे फिर तुमको
देखने को उसको जी भर के फिर से
कालेज के उस जमाने मे तुमको
मनोज दुबे श्रीकांत
वाह
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