मिर्ची गजल
खेत से घर जब आई मिर्ची
हरी लाल काली कहाई मिर्ची
बनाई जब तरकारी उसने
मुह मे जमके लगाई मिर्ची
तेज तरार वो भी ऐसी की
लोगो मे खुद कहाई मिर्ची
बातो से कभी कभी तो उसने
दिल मे सबके लगाई मिर्ची
जल भुन गए देख के उसको
तरक्की की जो बताई मिर्ची
सुनाकर खरी खोटी मन से
उसने जब जब लगाई मिर्ची
भाई बहन दोस्त सहेलियों संग
रिसतेदारो को भी लगाई मिरची
लग जाती किसी को भी श्रीकांत
दुनिया मे जब से आई मिर्ची
मनोज दुबे श्रीकांत
खेत से घर जब आई मिर्ची
हरी लाल काली कहाई मिर्ची
बनाई जब तरकारी उसने
मुह मे जमके लगाई मिर्ची
तेज तरार वो भी ऐसी की
लोगो मे खुद कहाई मिर्ची
बातो से कभी कभी तो उसने
दिल मे सबके लगाई मिर्ची
जल भुन गए देख के उसको
तरक्की की जो बताई मिर्ची
सुनाकर खरी खोटी मन से
उसने जब जब लगाई मिर्ची
भाई बहन दोस्त सहेलियों संग
रिसतेदारो को भी लगाई मिरची
लग जाती किसी को भी श्रीकांत
दुनिया मे जब से आई मिर्ची
मनोज दुबे श्रीकांत
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