Monday, August 3, 2020

गजल

मिर्ची गजल

खेत से घर जब आई मिर्ची
हरी लाल काली कहाई मिर्ची

बनाई जब तरकारी उसने
  मुह मे जमके लगाई मिर्ची

तेज तरार वो भी ऐसी की
लोगो मे  खुद  कहाई  मिर्ची

बातो से कभी कभी तो उसने
दिल मे सबके लगाई मिर्ची

जल भुन  गए देख के उसको
तरक्की की जो बताई मिर्ची

सुनाकर खरी खोटी मन से
 उसने जब   जब लगाई मिर्ची

भाई बहन दोस्त सहेलियों संग
 रिसतेदारो को  भी लगाई मिरची

लग जाती किसी को  भी श्रीकांत
दुनिया मे   जब से  आई  मिर्ची

मनोज दुबे श्रीकांत

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