Thursday, August 6, 2020

कविता

नमक हलाली  का मतलब 

मालिक के पीछे दौडते कुत्ते को
घाट के कुछ आवारा कुत्तो ने
रोका टोकते हुए भौका
बड़ी वफादारी निभा रहे हो भैया
मालिक के पीछे पीछे फालतू मे
 क्यो दोड़ रहे हो भैया
तुमहारे मालिक थुल थुल शरीर के
साथ अपनी तोंद कम कर
वजन घटा रहे
और आप अपने आप को
जबरदस्ती थका रहे है
तभी उनमे से एक खबीस
 अवारा कुत्ता बोला बीडू फुल
वफादार कुत्ता क्या बात है
अपुन साला गवार अवारा
टुकड़े तोड़ता झूटन चाटता
कमाल की जिंदगी जी रेला है
बांस बिंदास मालिक के
सामने दुम हिला रैला है
दोड़ लगाता कुत्ता फबतियो से
खाक हो गया
बिन बोले उससे रहा नही
गया कहने लगा गाडी मेघूमता हू
 ऐसी घर मे रहता हूँ।
दूध मलाई रोटी के साथ
 टोस बिस्कुट खाता हूँ
 और अपनी लाईफ मालिक
के साथ बिंदास बिताता हूऐ
इसमे तुम्हारा कया जाता है
मुझे मेरी इसी जिंदगी मे मजा
 आता पर बीडू तेको गुलामी
की गले  मे पड़ी जंंजीर
गले का पटटा और गुलामी का
 जीवन नजर नही आता तू वफादार नही
नमक हलाली कर रहा है
मालिक के तलवा चाटू जिदंगी जी रहा है
अपुन  कुत्तो की जमात
पर तू धब्बा सा लगता
तु जिसे ऐस की जिंदगी समझता है बीडू 
अपुन को तो फासी का फंदा लगता है

मनोज दुबे श्रीकांत

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