मोबाइल पर झगड़ते बच्चे
मोबाइल पर झगड़ते बच्चे
एक दूसरे से छुड़ाते बच्चे
चिल्लाते जम जम कर के
एक दूसरे पर झल्लाते बच्चे
मम्मी को चुप कराते बच्चे
अपनी बात सुनाते बच्चे
डांटने पर पापा के अक्सर
गुस्सा अपना जताते बच्चे
वाटस अप फेस बुक देखते
इंस्टा टिकटाक चलाते बच्चे
जीतने को मोबाइल गेम मे
अपनी आखें गडाते बच्चे
घर के अंदर अंदर रहते बच्चे
दीवाल से गर्दन टिकाते बच्चे
बार बार देखते मोबाइल अपना
लाईक कमेंट के कायल बच्चे
अपने अब कैसे होते बच्चे
सच्चे सच्चे से झूठे बच्चे
अपनी बात मनवाने को
अक्सर जिद्दी होते बच्चे
घर मे अकेले खेलते बच्चे
बाहर नही निकलते बच्चे
दुबले पतले वजन बढाते
टेंशन मे डूबे लगते बच्चे
मोबाईल अपना देखते बच्चे
पाठ याद न करते बच्चे
मा बाप सर की न सुनते
अपनी अपनी धकाते बच्चे
परिवार मे चुपचाप रहते बच्चे
मोबाईल पर चेट करते बचचे
समाज परिवेश से रहकर दूर
डिजिटल वर्ल्ड से होते बच्चे
गुमसुम गुमसुम से रहते बच्चे
दिखते हरपल व्यस्त से बच्चे
मोबाइल की दुनिया मे डूबकर
संस्कारो से दूर होते बच्चे
धार्मिक न सामाजिक बच्चे
आज्ञाकारी रहे न बच्चे
इंटर्नेट के अंधे युग मे
सब कुछ ताक मे रखते बच्चे
मनोज दुबे श्रीकांत

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