राष्ट्र नमन
हम युद्ध को नही अमन चैन चाहते
ये न समझना कि लडना नही जानते
निकाल कर रख देते है हम हेकड़ी सारी
आखो मे आख डाल कर जब बात करते
रखते है दिल हाथो पर अपने दोस्त की खातिर
रखते हैं जान हथेली पर दुश्मनों के खातिर
घोपता है छुरा जो पीठ मे लगाकर गले
माफ करते नही गददार जो दोस्त हो शातिर
हम करे सुरक्षा सीमा की तुम अपनी की करो
करने को कब्जा की मनशा दूर ही करो
इंच इंच फुट फुट नाप लेंगे हम कदमों से
चीन तु हमारे दम को देखा न करो
मनोज कुमार दुबे श्रीकांत
हम युद्ध को नही अमन चैन चाहते
ये न समझना कि लडना नही जानते
निकाल कर रख देते है हम हेकड़ी सारी
आखो मे आख डाल कर जब बात करते
रखते है दिल हाथो पर अपने दोस्त की खातिर
रखते हैं जान हथेली पर दुश्मनों के खातिर
घोपता है छुरा जो पीठ मे लगाकर गले
माफ करते नही गददार जो दोस्त हो शातिर
हम करे सुरक्षा सीमा की तुम अपनी की करो
करने को कब्जा की मनशा दूर ही करो
इंच इंच फुट फुट नाप लेंगे हम कदमों से
चीन तु हमारे दम को देखा न करो
मनोज कुमार दुबे श्रीकांत
No comments:
Post a Comment