Monday, June 29, 2020

मुक्तक

राष्ट्र नमन

हम युद्ध को नही अमन चैन चाहते
 ये न समझना कि लडना नही जानते
निकाल कर रख देते है हम हेकड़ी सारी
आखो मे आख डाल कर जब बात करते

रखते है दिल हाथो पर अपने दोस्त की खातिर
रखते हैं जान हथेली पर  दुश्मनों के खातिर
घोपता है  छुरा  जो पीठ  मे लगाकर गले
माफ करते नही गददार जो दोस्त हो शातिर

 हम करे  सुरक्षा सीमा की तुम अपनी की करो
करने को कब्जा की  मनशा दूर ही करो
इंच इंच फुट फुट नाप लेंगे हम  कदमों से
चीन   तु हमारे  दम को   देखा न करो

मनोज कुमार दुबे श्रीकांत

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