लघु कथा
आन लाईन कलास
गाव मे बहुत दिनो से विदयालय नही खुले थे
रवि चिंतित उसके पुराने बस्ते की किताब काफी पेंसिल को निकालकर बार बार देख रहा था तो कभी अपनी टूटी सलेट मे से झाकते कह रहा था बाबू जी पटेल साहब की बिटिया कल हमारे साथ खेल रही थी तो उसकी मम्मी चिल्लाते हुए कह रही थी सोनू आन लाईन कलास जवाईन नही करनी देर हो रही है बाबू जी ये आन लाईन कलास कया होती बाबू जी मूक थे और सोच रहे थे काश उनके पास भी एक ऐंडराईड मोबाइल होता तो रवि भी पटेल साहब की सोनू जैसा आन लाईन पढता
मनोज दुबे श्रीकांत


वाह
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