Monday, June 29, 2020

लघु कथा

लघु कथा
आन लाईन कलास
गाव मे बहुत दिनो से विदयालय नही खुले थे
रवि चिंतित उसके पुराने बस्ते की किताब काफी पेंसिल को निकालकर बार बार देख रहा था तो कभी अपनी टूटी सलेट मे से झाकते कह रहा था बाबू जी पटेल साहब की बिटिया कल हमारे साथ खेल रही थी तो उसकी मम्मी चिल्लाते हुए कह रही थी सोनू आन लाईन  कलास जवाईन नही करनी देर हो रही है बाबू जी ये आन लाईन कलास कया होती बाबू जी मूक थे और सोच रहे थे काश उनके पास भी एक ऐंडराईड मोबाइल होता तो रवि भी पटेल साहब की सोनू जैसा आन लाईन पढता
मनोज दुबे श्रीकांत


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व्यंग

 [12/9/2020, 11:56 AM] Manoj Dubey: आन लाईन कलास का पंगा  कल आन लाईन कलास मे  हमने कैमरा आन करने का  बोला कुछ छातरो का  मन भय से डोला  पंद्र...