व्यंग्य
चुनावी सीख
भैया कल तक पार्क मोहल्ला
घाट पर फालतू घूमते थे
आजकल तो बिल्कुल भी
दिखाई नही दे रहे हो लगता है
आजकल आप लोग
ज्यादा व्यस्त दिख रहै हो
तूमहारा भोकना धमा चोकडी
करना काउ काऊ करके
चिल्लाना आजकल बिल्कुल भी
सुनाई नही दे रहा है
मोहल्ला गली घाट पर अब
आपका हल्ला सुनाई नही दे रहा है
दुबे जी आजकल हम पर चुनावी रंग
इस कदर चढ रहा है
वोट राजनीति रैली भाषण के
सिवाय और कुछ नही सूझ रहा है
भैया आजकल खाना पीना रहना खाना
सब कुछ फी मिल रहा है और जीवन की
मत पुछो दुबे जीवो तो
बडा मस्त गुजर रहा है
भोकने चिल्लाने रोटी के
लिए लडने की जद्दोजहद
भी कम हो रही है जिदगी अपनी
आजकल चुनावी दोर मे
मतदान सी कट रही है
रात को थक हार के पार्टी
आम सभा के टैट मे ही
सो जाते है पार्टी के नमक
का कर्ज हम तुरंत उतार देते है
तो हम ने कहा आजकल
तुम बढिया चोकीदार निभा रहै
हो और हम ने जो तुम है
पाला पोसा बचपन से उसे भुला
रहे हो चुनाव के बाद बेटा हम
तुम्हारा एक एक हिसाब पूर्ण कर
देगे जी एस टी काट
कर ही रोटी पानी देगे
फिर मत हिलाना न दिखाना
पेट न चाटना तलवा और न
करना पहरे दारी ओर बन
जाना आवारा गरीब कुत्ता
फिर हाथ मिलाउंगा पारटी
नेता रेली कितने
काम आते है बताऊगा
तुम कुत्ते थे कुत्ते और
कुत्ते ही रहोगे न सुधरे हो
न सुधरे थे और न कभी सुधरोगे
दुबे जी आप तो खाम खा गुस्सा हो रहे है
अरे चुनावी माहोल का
आप भी आनंद लीजिये
अपनी बेरोजगारी के दिनो मे
आप भी रोज गार पाईये
चुनाव रैली आमसभा रोड सो मे
रोजाना पाच सो खाना पीना मुफ्त पाइए
मनोज दुबे श्रीकांत
चुनावी सीख
भैया कल तक पार्क मोहल्ला
घाट पर फालतू घूमते थे
आजकल तो बिल्कुल भी
दिखाई नही दे रहे हो लगता है
आजकल आप लोग
ज्यादा व्यस्त दिख रहै हो
तूमहारा भोकना धमा चोकडी
करना काउ काऊ करके
चिल्लाना आजकल बिल्कुल भी
सुनाई नही दे रहा है
मोहल्ला गली घाट पर अब
आपका हल्ला सुनाई नही दे रहा है
दुबे जी आजकल हम पर चुनावी रंग
इस कदर चढ रहा है
वोट राजनीति रैली भाषण के
सिवाय और कुछ नही सूझ रहा है
भैया आजकल खाना पीना रहना खाना
सब कुछ फी मिल रहा है और जीवन की
मत पुछो दुबे जीवो तो
बडा मस्त गुजर रहा है
भोकने चिल्लाने रोटी के
लिए लडने की जद्दोजहद
भी कम हो रही है जिदगी अपनी
आजकल चुनावी दोर मे
मतदान सी कट रही है
रात को थक हार के पार्टी
आम सभा के टैट मे ही
सो जाते है पार्टी के नमक
का कर्ज हम तुरंत उतार देते है
तो हम ने कहा आजकल
तुम बढिया चोकीदार निभा रहै
हो और हम ने जो तुम है
पाला पोसा बचपन से उसे भुला
रहे हो चुनाव के बाद बेटा हम
तुम्हारा एक एक हिसाब पूर्ण कर
देगे जी एस टी काट
कर ही रोटी पानी देगे
फिर मत हिलाना न दिखाना
पेट न चाटना तलवा और न
करना पहरे दारी ओर बन
जाना आवारा गरीब कुत्ता
फिर हाथ मिलाउंगा पारटी
नेता रेली कितने
काम आते है बताऊगा
तुम कुत्ते थे कुत्ते और
कुत्ते ही रहोगे न सुधरे हो
न सुधरे थे और न कभी सुधरोगे
दुबे जी आप तो खाम खा गुस्सा हो रहे है
अरे चुनावी माहोल का
आप भी आनंद लीजिये
अपनी बेरोजगारी के दिनो मे
आप भी रोज गार पाईये
चुनाव रैली आमसभा रोड सो मे
रोजाना पाच सो खाना पीना मुफ्त पाइए
मनोज दुबे श्रीकांत
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